प्रिय अतिथियों!एक बार फिर अपनी आरम्भिक बातचीत की ओर पलटना चाहूंगा. संसार की परिस्थितियां बहुत संवेदनशील हैं और दुनिया बड़े महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ से गुज़र रही है। उम्मीद है कि एक नई व्यवस्था जन्म लेगी। गुट निरपेक्ष आंदोलन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दो तिहाई से अधिक सदस्य शामिल है जो भविष्य के आंकड़े तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. तेहरान में इस महान बैठक का आयोजन ख़ुद एक बड़ी बात है जिसे आंकड़ों और अनुमानों में मद्देनज़र रखना चाहिए। हम इस आंदोलन के सदस्य अपनी व्यापक क्षमताओं और संभावनाओं के बीच विकास द्वारा संसार को अशांति, युद्ध और वर्चस्ववाद से निजात दिलाने के लिए यादगार और ऐतिहासिक भूमिका निभा सकते हैं।यह उद्देश्य आपस में हमारे आपसी सहयोग से ही प्राप्त हो सकता है। हमारे बीच बहुत अमीर देश और गहरी धाक रखने वाले देशों की संख्या कम नहीं है। आर्थिक और मीडिया के मैदान में सहयोग और आगे ले जाने और बुलंदियों पर पहुंचाने वाले अनुभवों के तबादले के मामले में समस्याओं का समाधान निश्चित रूप से सम्भव हो जाएगा। हमें चाहिए कि अपने इरादे और संकल्प को मज़बूती दें। उद्देश्य के प्रति वफादार रहें, वर्चस्ववादी देशों के ग़ुस्से से न डरें और उनकी मुस्कराहटों के झांसे में न आएं, अल्लाह के इरादे और नियमों को अपना समर्थक समझें, दो दशकों पहले कम्युनिस्ट दलों की हार और वर्तमान दौर में पश्चिम की तथाकथित उदारवादी डेमोक्रेसी की नीतियों की पराजय को, जिसके आसार यूरोपीय देशों और अमेरिका की सड़कों पर और इन देशों की अर्थव्यवस्था की मुश्किलें सबके सामने हैं, इससे सबक़ लें।और अंतिम बात यह कि उत्तर अफ्रीका में अमरीका पर निर्भर और ज़ायोनी शासन के सहायक तानाशाहों के पतन और क्षेत्र के देशों में फैली इस्लामी जागरूकता को हमें बहुत बड़ा अवसर समझना चाहिए। हम वैश्विक प्रबंधन में गुट निरपेक्ष आंदोलन की राजनीतिक भूमिका को बढ़ावा देने के बारे में विचार कर सकते हैं, इस प्रशासनिक प्रणाली में परिवर्तन लाने के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के जमा करने और इसके लागू किए जाने के संसाधन फ़राहम कर सकते हैं, हम प्रभावी आर्थिक सहयोग की ओर प्रगति की योजना और अपने बीच सांस्कृतिक संपर्कों के आदर्शों को निर्धारित कर सकते हैं। एक सक्रिय सचिवालय का गठन उन लक्ष्यों की प्राप्ति में बहुत प्रभावी और उपयोगी हो सकता है।धन्यवाद
30 अगस्त 2012 - 19:30
समाचार कोड: 342995
एक बार फिर अपनी आरम्भिक बातचीत की ओर पलटना चाहूंगा. संसार की परिस्थितियां बहुत संवेदनशील हैं और दुनिया बड़े महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ से गुज़र रही है..........